बांकुड़ा में खेत बचाओ अभियान के तहत मंत्री ने मृदा संरक्षण और सतत कृषि को जन आंदोलन बनाने का किया आह्वान

बांकुड़ा में खेत बचाओ अभियान के तहत मंत्री ने मृदा संरक्षण और सतत कृषि को जन आंदोलन बनाने का किया आह्वान

11 जून, 2026, बांकुड़ा

देशव्यापी खेत बचाओ अभियान (सेव द फील्ड्स कैंपेन) को बांकुड़ा जिले में महत्वपूर्ण गति मिली, जब भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान (अटारी), कोलकाता, के मार्गदर्शन में कृषि विज्ञान केंद्र (डब्ल्यूबीसीएडीसी), सोनामुखी ने आज बड़े पैमाने पर किसान जागरूकता कार्यक्रम-सह-आदान वितरण का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में लगभग 200 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें किसान, वैज्ञानिक, प्रसार कार्मिक तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल थे। सभी ने मृदा स्वास्थ्य, सतत कृषि और पर्यावरणीय संरक्षण को बढ़ावा देने के सामूहिक प्रयास में सहभागिता की।

पश्चिम बंगाल सरकार के सहकारिता, वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री श्री दिवाकर घरामी ने कहा कि कृषि और ग्रामीण आजीविका के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए मृदा का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। सभा को संबोधित करते हुए श्री घरामी ने कहा कि मृदा केवल फसल उत्पादन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह एक जीवंत संसाधन है जो पारिस्थितिक तंत्र, खाद्य सुरक्षा और मानव कल्याण को बनाए रखता है। उन्होंने कहा कि रासायनिक आदानों का अत्यधिक और असंतुलित उपयोग मृदा उर्वरता और पर्यावरणीय स्वास्थ्य के लिए दीर्घकालिक जोखिम उत्पन्न करता है। उन्होंने आगे बल दिया कि सतत कृषि, पर्यावरण संरक्षण और किसानों का कल्याण एक-दूसरे के पूरक होने चाहिए तथा किसानों तक वैज्ञानिक ज्ञान सीधे पहुंचाने में कृषि विज्ञान केंद्रों और प्रसार एजेंसियों की भूमिका की सराहना की।

Minister Calls for a People’s Movement to Save Soil and Sustainable Farming at Khet Bachao Abhiyan in Bankura

डॉ. प्रदीप डे, निदेशक, भाकृअनुप-अटारी, कोलकाता, ने वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि विकसित भारत 2047 की परिकल्पना के अनुरूप खेत बचाओ अभियान एक राष्ट्रीय जन आंदोलन है, जो वन हेल्थ दृष्टिकोण को बढ़ावा देता है। यह मृदा स्वास्थ्य, खाद्य एवं पोषण सुरक्षा, पर्यावरणीय स्थिरता और किसानों की समृद्धि के बीच संबंधों को सुदृढ़ करता है। उन्होंने संतुलित उर्वरक उपयोग, मृदा परीक्षण तथा हरित खाद, वर्मी कम्पोस्ट और जैव उर्वरकों जैसे सतत पोषक तत्व प्रबंधन उपायों को अपनाकर मृदा स्वास्थ्य के पुनर्जीवन और जलवायु-लचीली कृषि प्रणाली के निर्माण पर बल दिया। डॉ. डे ने किसानों को फसल विविधीकरण, लाभप्रदता में वृद्धि, आयात निर्भरता में कमी और राष्ट्रीय पोषण सुरक्षा को मजबूत करने के लिए दलहन एवं तिलहन मिशनों का लाभ उठाने के लिए भी प्रेरित किया।

कार्यक्रम में श्री शाम्वो गांगुली, सहायक कृषि निदेशक (एडीए), श्री गोराचंद बर्मन, बीडीओ, सोनामुखी तथा बांकुड़ा जिले के कृषि एवं संबद्ध विभागों के अधिकारियों की उपस्थिति रही। गणमान्य व्यक्तियों ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कृषि उत्पादकता, पर्यावरणीय स्थिरता, खाद्य एवं पोषण सुरक्षा तथा कृषक परिवारों के आर्थिक कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए मृदा स्वास्थ्य का संरक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने जलवायु-लचीली और संसाधन-कुशल कृषि पद्धतियों को अपनाने में तेजी लाने के लिए विभागों के बीच बेहतर समन्वय और विज्ञान-आधारित परामर्शों की व्यापक पहुंच की आवश्यकता पर बल दिया।

अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों तक व्यावहारिक, खेत-स्तरीय ज्ञान और क्रियान्वित किए जा सकने वाले परामर्श सीधे पहुंचाना था। उर्वरकों के कुशल उपयोग, रासायनिक आदानों के अत्यधिक उपयोग में कमी तथा आदान उपयोग दक्षता में सुधार पर विशेष बल दिया गया, ताकि उत्पादन लागत को कम करते हुए दीर्घकालिक मृदा उर्वरता की रक्षा की जा सके। किसानों को मृदा की जैविक सक्रियता और लचीलापन बढ़ाने में हरित खाद, वर्मी कम्पोस्ट और जैव उर्वरकों के लाभों के बारे में जागरूक किया गया।

Minister Calls for a People’s Movement to Save Soil and Sustainable Farming at Khet Bachao Abhiyan in Bankura

कार्यक्रम में मृदा परीक्षण के महत्व को भी रेखांकित किया गया, जो पोषक तत्वों की स्थिति को समझने तथा उपयुक्त, लाभकारी और स्थान-विशिष्ट फसल प्रणालियों के चयन के लिए एक वैज्ञानिक उपकरण है। प्रतिभागियों को सरकार की प्रमुख पहलों, जिनमें दलहन मिशन और तिलहन मिशन शामिल हैं, की जानकारी दी गई। इन पहलों का उद्देश्य फसल विविधीकरण को बढ़ावा देना, उत्पादकता बढ़ाना, आयात निर्भरता को कम करना तथा कृषक परिवारों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर सृजित करना है। इस अवसर पर कृषि आदानों का वितरण भी किया गया।

किसानों, वैज्ञानिकों, प्रशासकों और प्रसार एजेंसियों के बीच संवाद के एक सशक्त मंच के रूप में इस कार्यक्रम ने स्थानीय कृषि चुनौतियों तथा लचीली और सतत कृषि प्रणालियों की दिशा में व्यावहारिक समाधान पर सार्थक चर्चा को प्रोत्साहित किया।

कृषि विज्ञान केन्द्र, सोनामुखी में खेत बचाओ अभियान का सफल आयोजन इस बात की पुनर्पुष्टि करता है कि आईसीएआर-एटारी, कोलकाता, कृषि विज्ञान केंद्रों और संबंधित विभागों की प्रतिबद्धता विज्ञान-आधारित परामर्शों, सतत कृषि प्रौद्योगिकियों और नीतिगत अवसरों को जमीनी स्तर तक पहुंचाने की है, जिससे स्वस्थ मृदा, लचीले कृषि तंत्र और अधिक सतत कृषि भविष्य के निर्माण में योगदान सुनिश्चित हो सके।

(स्रोत: भाकृअनुप–कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, कोलकाता)

×