राष्ट्रव्यापी खेत बचाओ अभियान पहल के अंतर्गत, भाकृअनुप–केन्द्रीय तटीय कृषि अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप–सीसीएआरआई), गोवा, ने किसानों के बीच सतत एवं जलवायु-लचीली कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से करमाली गांव में मृदा स्वास्थ्य पर एक सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य वैज्ञानिक मृदा प्रबंधन एवं पर्यावरण-अनुकूल खेती के माध्यम से मृदा उर्वरता का पुनरुद्धार करना तथा सतत कृषि उत्पादन को बढ़ावा देना था। किसानों ने वैज्ञानिकों एवं विस्तार कर्मियों के साथ संवादात्मक चर्चाओं में सक्रिय रूप से भाग लिया और क्षेत्र में प्रचलित कृषि चुनौतियों तथा वर्तमान खेती पद्धतियों से संबंधित अपने अनुभव साझा किया।
आउटरीच गतिविधियों के अंतर्गत, समीक्षा शिरगांवकर के साथ एक प्रशंसापत्र वीडियो रिकॉर्ड किया गया, जिसमें उन्होंने स्थानीय कृषि प्रणालियों में उर्वरक उपयोग एवं मृदा प्रबंधन पद्धतियों से संबंधित अपने व्यावहारिक अनुभव भी साझा किया।

The programme also included the distribution of Dhaincha seeds among participating farmers. Technical briefings कार्यक्रम के दौरान भाग लेने वाले किसानों के बीच ढैंचा के बीज भी वितरित किए गए। ढैंचा को हरित खाद फसल के रूप में उसके महत्व तथा मृदा में कार्बनिक पदार्थ बढ़ाने, मृदा उर्वरता सुधारने और दीर्घकालिक सतत उत्पादकता को समर्थन देने में उसकी भूमिका पर तकनीकी जानकारी प्रदान की गई। किसानों को अनुशंसित खेती पद्धतियों एवं फसल के प्रभावी उपयोग के तरीकों पर भी वैज्ञानिक मार्गदर्शन दिया गया।
जागरूकता कार्यक्रम का समापन एक संवादात्मक समूह सत्र के साथ हुआ, जिसमें गोवा के कृषि समुदाय के लिए जमीनी स्तर पर किसानों की सहभागिता को सुदृढ़ करने और विज्ञान-आधारित कृषि हस्तक्षेपों को बढ़ावा देने के प्रति आईसीएआर–सीसीएआरआई की प्रतिबद्धता को पुनः रेखांकित किया गया।
(स्रोत: भाकृअनुप–केन्द्रीय तटीय कृषि अनुसंधान संस्थान, गोवा)







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