भारत में कृषि सहकारी समितियों को मजबूत करने हेतु वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं पर अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन

भारत में कृषि सहकारी समितियों को मजबूत करने हेतु वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं पर अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन

15–16 दिसंबर, 2025, नई दिल्ली

राष्ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के सहयोग से 15–16 दिसंबर, 2025 को एनएएएस, एनएएससी कॉम्प्लेक्स, नई दिल्ली में 'वैश्विक स्तर पर कृषि सहकारी समितियों में सर्वोत्तम प्रथाएं: सतत आर्थिक विकास और ग्रामीण परिवर्तन के लिए भारत में सहकारी समितियों को सशक्त बनाना' विषय पर एक अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया।

मुख्य अतिथि के रूप में उद्घाटन संबोधन देते हुए, डॉ. एम. एल. जाट, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डेयर) के सचिव तथा महानिदेशक (भाकृअनुप), ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सतत कृषि विकास, ग्रामीण समृद्धि और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा प्राप्त करने के लिए कृषि सहकारी समितियां महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं, जलवायु लचीलेपन तथा मूल्य-श्रृंखला एकीकरण के अनुरूप, नवाचार-संचालित, बाज़ार-उन्मुख और प्रौद्योगिकी-सक्षम सहकारी समितियों की आवश्यकता पर बल दिया। डॉ. जाट ने किसान समूहों को सशक्त बनाने और एक लचीली और समावेशी ग्रामीण अर्थव्यवस्था के भारत के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए क्षमता निर्माण, डिजिटलीकरण तथा मजबूत संस्थागत संबंधों के महत्व पर भी ज़ोर दिया।

International Workshop Highlights Global Best Practices to Strengthen Agricultural Cooperatives in India

15 दिसंबर, 2025 को आयोजित उद्घाटन सत्र की शुरुआत डॉ. डब्ल्यू. एस. लाकरा, सचिव, एनएएएस, के स्वागत संबोधन से हुई, जिसके बाद एनएएएस के विदेश सचिव प्रो. के.एम. मारेडिया ने कार्यशाला का अवलोकन प्रस्तुत किया।

डॉ. पी.के. जोशी, उपाध्यक्ष, एनएएएस, ने किसानों की आय बढ़ाने, समावेशिता को बढ़ावा देने और बाजार तक पहुँच में सुधार करने में कृषि सहकारी समितियों की परिवर्तनकारी भूमिका पर प्रकाश डाला।

कार्यशाला में अमेरिका, फ्रांस, तंजानिया, फिलीपींस, ब्राजील, इंडोनेशिया, श्रीलंका तथा नेपाल के विशेषज्ञों द्वारा साझा किए गए समृद्ध अंतर्राष्ट्रीय दृष्टिकोण शामिल थे, जिन्होंने सफल सहकारी मॉडल प्रस्तुत किए और विभिन्न कृषि प्रणालियों में शासन, वित्तपोषण, डिजिटलीकरण एवं बाज़ार एकीकरण में नवाचारों पर प्रकाश डाला।

एनडीडीबी, बागवानी, चीनी सहकारी समितियों, मत्स्य पालन, आईएफसीओ, एनएएफईडी, मुल्कनूर सहकारी समिति और आईआरएडीए सहित विविध सहकारी क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले विशेषज्ञों द्वारा भारतीय अनुभव प्रदर्शित किए गए, जिसमें किसानों की आय, आजीविका एवं ग्रामीण विकास को बढ़ाने में सहकारी समितियों की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाया गया।

कार्यक्रम में प्रोफेशनल एसोसिएशंस ऑफ़ एग्रीकल्चरल साइंसेज (पीएएएस) द्वारा अनुभव साझा करना, विषयगत ब्रेकआउट समूह चर्चाएं और भारत में कृषि सहकारी समितियों को मजबूत करने के लिए आगे की राह की रूपरेखा प्रस्तुत करने वाली एक पैनल चर्चा भी शामिल थी।

International Workshop Highlights Global Best Practices to Strengthen Agricultural Cooperatives in India

चर्चाओं में एक मजबूत, इनोवेशन-आधारित तथा टेक्नोलॉजी-सक्षम कोऑपरेटिव इकोसिस्टम बनाने की जरूरत पर जोर दिया गया, जिसे मजबूत संस्थागत ढाँचे, लगातार क्षमता निर्माण और सहायक पॉलिसी सपोर्ट का समर्थन मिले। वर्कशॉप में भारत में स्थायी आर्थिक विकास और ग्रामीण बदलाव के लिए कृषि कोऑपरेटिव के महत्व को एक आधारशिला के रूप में फिर से पक्का किया गया।

उद्घाटन कार्यक्रम का समापन डॉ. चेरुकमल्ली श्रीनिवास राव, निदेशक, भाकृअनुप-आईएआरआई द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ।

(स्रोत: राष्ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी, नई दिल्ली)

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