दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के अंतर्गत अटारी, कोलकाता एवं आईआईपीआर, कानपुर द्वारा अभिसरण बैठक–सह–क्षमता निर्माण कार्यक्रम का सफल आयोजन

दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के अंतर्गत अटारी, कोलकाता एवं आईआईपीआर, कानपुर द्वारा अभिसरण बैठक–सह–क्षमता निर्माण कार्यक्रम का सफल आयोजन

8 जनवरी, 2026, कोलकाता

दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के अंतर्गत दलहन उत्पादन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान (अटारी), कोलकाता, एवं भाकृअनुप–भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान (आईआईपीआर), कानपुर, द्वारा ओडिशा एवं पश्चिम बंगाल के कृषि विज्ञान केन्द्रों (केवीके) हेतु हाइब्रिड मोड में अभिसरण बैठक–सह–क्षमता निर्माण कार्यक्रम का संयुक्त रूप से आयोजन किया गया।

   

सभा को संबोधित करते हुए डॉ. प्रदीप डे, निदेशक, भाकृअनुप-अटारी, कोलकाता, ने प्रोटीन सुरक्षा सुनिश्चित करने, मृदा स्वास्थ्य में सुधार तथा सतत एवं जलवायु-अनुकूल कृषि प्रणालियों को सुदृढ़ करने में दलहनों की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने 2030–31 तक देश में दलहन उत्पादन को 350 लाख टन तक बढ़ाने तथा 310 लाख हैक्टर क्षेत्र विस्तार के भारत सरकार और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के विजन का उल्लेख करते हुए, दलहन-आधारित हस्तक्षेपों के विस्तार तथा संपूर्ण बीज जीवन-चक्र में साथी (एसएटीएचआई) पोर्टल के प्रभावी उपयोग में कृषि विज्ञान केन्द्र की निर्णायक भूमिका को रेखांकित किया। डॉ. डे ने निष्कर्ष के तौर पर कहा कि समन्वित एवं प्रौद्योगिकी-आधारित प्रयास ही आयात पर निर्भरता कम करने एवं दलहनों में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के भारत के लक्ष्य को साकार करने की एकमात्र कुंजी हैं।

डॉ. जी.पी. दीक्षित, निदेशक, भाकृअनुप-आईआईपीआर, कानपुर, ने दलहन विकास से जुड़ी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं, प्रजनन में नवीन प्रगति, तथा उत्पादकता और लाभप्रदता बढ़ाने हेतु प्रौद्योगिकीय हस्तक्षेपों पर महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं।

 

कार्यक्रम के दौरान पश्चिम बंगाल एवं ओडिशा में रबी दलहन उत्पादन प्रौद्योगिकियों पर तकनीकी प्रस्तुतियां दी गईं। डॉ. देबज्योति सेनगुप्ता, वरिष्ठ वैज्ञानिक, भाकृअनुप–आईआईपीआर, कानपुर, द्वारा परिस्थिति-विशिष्ट किस्मों की अनुशंसाओं पर प्रस्तुति दी गई। डॉ. नरेंद्र कुमार, प्रमुख, फसल उत्पादन प्रभाग, भाकृअनुप–आईआईपीआर, कानपुर, ने दलहन उत्पादन तकनीकों का समग्र अवलोकन प्रस्तुत किया।

विशेष प्रश्नोत्तरी सत्र के दौरान दलहन प्रदर्शन से जुड़े कृषि विज्ञान केन्द्र प्रमुखों एवं विषय वस्तु विशेषज्ञों ने क्षेत्रीय स्तर पर कार्यान्वयन हेतु व्यावहारिक मार्गदर्शन तथा तकनीकी एवं परिचालन संबंधी शंकाओं का समाधान भी प्राप्त किया।

इस कार्यक्रम में ओडिशा एवं पश्चिम बंगाल में दलहन उत्पादन तथा प्रदर्शन से जुड़े प्रमुखों और विषय विशेषज्ञों की सक्रिय सहभागिता रही, जिससे दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु कृषि विज्ञान केन्द्रों की क्षमता, अभिसरण और तैयारियों को सुदृढ़ किया गया।

डॉ. एस.के. मोंडल, प्रधान वैज्ञानिक, भाकृअनुप–अटारी, कोलकाता, द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया।

(स्रोत: भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, कोलकाता)

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