भाकृअनुप-आईएआरआई में इनोवेटिव फार्मर्स कॉन्क्लेव का आयोजन

भाकृअनुप-आईएआरआई में इनोवेटिव फार्मर्स कॉन्क्लेव का आयोजन

24 दिसंबर, 2025, नई दिल्ली

भाकृअनुप–भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली, द्वारा आयोजित दो दिवसीय इनोवेटिव फार्मर्स कॉन्क्लेव 2025 आज सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह कॉन्क्लेव 23-24 दिसंबर को किसानों के मसीहा के रूप में पूजनीय चौधरी चरण सिंह की जयंती मनाने के लिए आयोजित किया गया था, और इसका उद्देश्य स्थायी और समावेशी कृषि विकास के लिए किसान-नेतृत्व वाले नवाचारों का जश्न मनाना, उन्हें दस्तावेज़ करना और मुख्यधारा में लाना था।

श्री भागीरथ चौधरी, केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री, ने चौधरी चरण सिंह को श्रद्धांजलि दी और इस दृष्टिकोण को दोहराया कि राष्ट्रीय खुशी किसानों की समृद्धि में निहित है। उन्होंने जलवायु और पानी की चुनौतियों के बावजूद भारतीय किसानों को लगातार इनोवेटर बताते हुए, खेती प्रणालियों में स्मार्ट कृषि, डिजिटल उपकरणों, ड्रोन और आधुनिक तकनीकों को एकीकृत करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

सभा को संबोधित करते हुए, डॉ. एम.एल. जाट, सचिव (डेयर) एवं महानिदेशक (भाकृअनुप), ने किसानों को "राष्ट्र के असली रत्न" बताया। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि किसान दिवस केवल एक प्रतीकात्मक अवसर नहीं है, बल्कि राष्ट्र निर्माण में किसानों की केंद्रीय भूमिका की याद दिलाता है। उन्होंने कहा कि किसान "अभ्यास के प्रोफेसर" हैं और उनकी प्रतिक्रिया आने वाले वर्षों के लिए भाकृअनुप के अनुसंधान दिशानिर्देशों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने विकसित भारत @2047 के विज़न पर प्रकाश डाला, इस बात पर ज़ोर दिया कि एक विकसित भारत तभी संभव है जब किसान सशक्त, समृद्ध हों और अनुसंधान और नवाचार में सक्रिय रूप से शामिल हों।

Innovative Farmers Conclave Organised at ICAR–IARI

डॉ. डी.के. यादव, उप-महानिदेशक (फसल विज्ञान) भाकृअनुप, ने इस अभिनव पहल के लिए भाकृअनुप–आएआरआई को बधाई दी। उन्होंने इस कॉन्क्लेव के माध्यम से किसानों के नवाचारों को मुख्यधारा में लाने के भाकृअनुप–आएआरआई के प्रयासों की सराहना की, जिसे विशिष्ट रूप से किसानों को प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, फसल और बागवानी विज्ञान, महिला सशक्तिकरण और उद्यमिता सहित विभिन्न पहलुओं पर अपने अनुभव साझा करने की अनुमति देने के लिए योजना बनाई गई थी।

चेरुकमल्ली श्रीनिवास राव, निदेशक, भाकृअनुप–आएआरआई, ने चौधरी चरण सिंह की किसान-केन्द्रित विरासत को याद किया और इस कॉन्क्लेव को जमीनी स्तर के नवाचारों की पहचान करने, दस्तावेजीकरण करने तथा प्रसारित करने के लिए एक समयोचित मंच बताया। डॉ. राव ने बताया कि 25 राज्यों के किसानों ने भाग लिया, जिन्होंने जलवायु परिवर्तनशीलता, मौसम की अनिश्चितता और बाजारों से संबंधित चुनौतियों पर चर्चा करते हुए अभिनव प्रथाओं, स्वदेशी प्रौद्योगिकियों और सफल मॉडलों का प्रदर्शन किया। इस कार्यक्रम में किसानों के इनोवेशन को डॉक्यूमेंट करने वाले पब्लिकेशन भी जारी किए गए, साथ ही टेक्निकल सेशन भी हुए जिनसे आपस में सीखने और किसानों के बीच जानकारी के आदान-प्रदान को बढ़ावा मिला।

Innovative Farmers Conclave Organised at ICAR–IARI

24 दिसंबर को हुए समापन सत्र में ट्रस्ट फॉर एडवांसमेंट ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज (टीएएएस) के संस्थापक अध्यक्ष राज एस. परोदा मुख्य अतिथि थे। उन्होंने किसान-नेतृत्व वाले इनोवेशन, समावेशी विकास, केमिकल पेस्टिसाइड पर निर्भरता कम करने और बायो-पेस्टीसाइड के ज़्यादा इस्तेमाल, और विकसित भारत को साकार करने के लिए किसानों, वैज्ञानिकों और संस्थानों के बीच सामूहिक कार्रवाई पर ज़ोर दिया। उन्होंने प्रगति को तेज़ करने के लिए किसानों के बीच ज्ञान के प्रसार के महत्व पर भी प्रकाश डाला।

कॉन्क्लेव का समापन आर. एन. पडारिया, संयुक्त निदेशक (एक्सटेंशन), भाकृअनुप–आएआरआई, के धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने दो दिवसीय कार्यक्रम को सफल बनाने में किसानों, वैज्ञानिकों एवं आयोजकों के प्रयासों को स्वीकार किया तथा देश भर में किसान-वैज्ञानिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए भाकृअनुप–आएआरआई की प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

(स्रोत: भाकृअनुप–भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली)

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