पशु पोषण एवं शरीर क्रिया विज्ञान

हरित धारा, आंत्रिक मीथेन उत्सर्जन को 18-20% तक कम करने के लिए विकसित उत्पाद, जिसका B अनुपात 3:1 है।

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नैनो-माइक्रो मैट्रिसेस-फाइटोकेमिकल संयुग्मों का संश्लेषण: नैनो मिनरल फाइटोकेमिकल संयुग्म के संश्लेषण के लिए प्रोटोकॉल विकसित किया गया। विकसित नैनो कणों को उनकी जैव सक्रियता जैसे रोगाणुरोधी गतिविधि, सूजन-रोधी गतिविधि और एंटीऑक्सीडेंट गतिविधि के लिए अभिलक्षित किया गया और उन्हें अत्यधिक प्रभावी पाया गया।

ऊंट के दूध तथा दुग्ध उत्पादों का मूल्यांकन किया जा रहा है, जिनमें मधुमेह, ऑटिज्म, तपेदिक, डेंगू आदि विभिन्न मानव रोगों के विरुद्ध न्यूट्रास्यूटिकल गुण होने की संभावना है।

दूध छुड़ाने से पूर्व मेमनों/बकरी के बच्चों की बेहतर वृद्धि दर और बेहतर उत्तरजीविता के लिए तरल दूध फॉर्मूला (Memnaprash) विकसित किया गया।

मक्का एवं सोयाबीन मील के विकल्पों का मूल्यांकन किया गया और पोल्ट्री आहार में उनके सुरक्षित समावेशन स्तर का अनुमान लगाया गया। फाइटेज और विटामिन D3 के उपयोग से आहार में P की आवश्यकता को कम करने की प्रौद्योगिकियां विकसित की गईं। पोल्ट्री में गर्मी के तनाव को कम करने के लिए एक फीड एडिटिव, OxyCure, विकसित किया गया। अंडा देने वाली मुर्गियों की मोल्टिंग की मानवीय विधि विकसित की गई। DprEubioticA-एंटीबायोटिक ग्रोथ प्रमोटर का एक विकल्प विकसित किया गया। पौधों के अर्क का उपयोग करके विभिन्न नैनो खनिजों के जैव-संश्लेषण की विधि को अनुकूलित किया गया।

लाभकारी याक पालन तथा पारंपरिक ट्रांसह्यूमेन्ट याक पालन से जुड़ी कठिनाइयों को कम करने के लिए अर्ध-सघन मॉडल विकसित किया गया।

भाकृअनुप-राष्ट्रीय मांस अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद ने मांस प्रजाति की पहचान, खाद्य सूक्ष्मजीव विज्ञान और मांस पोषक तत्व एवं अवशेष विश्लेषण के लिए ISO/IEC 17025:2017 के अनुसार NABL मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाएं स्थापित की हैं। संस्थान में विकसित जीनोमिक और प्रोटिओमिक आधारित मांस प्रजाति और लिंग पहचान प्रौद्योगिकियों का सफलतापूर्वक उपयोग और व्यावसायीकरण किया गया है तथा नियामक और निजी एजेंसियों को सेवाएं प्रदान की गई हैं। संस्थान को राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से FSSAI द्वारा मांस और मांस उत्पादों के लिए राष्ट्रीय रेफरल प्रयोगशाला के रूप में मान्यता दी गई है। मांस प्रजाति निर्धारण (पोर्क और चिकन) और रोगजनक पहचान (Bacillus, Listeria और Coxiella) के लिए परीक्षण विकसित किए गए।

भाकृअनुप-राष्ट्रीय मांस अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद ने मांस एवं मांस उत्पादों के स्वच्छ प्रसंस्करण के लिए प्रौद्योगिकियां विकसित की हैं। पशु उप-उत्पादों के उपयोग, पर्यावरण संरक्षण तथा मांस मूल्य श्रृंखला में आय बढ़ाने के लिए अत्याधुनिक मांस प्रसंस्करण, पोल्ट्री प्रसंस्करण, रेंडरिंग और पेट फूड प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित की गईं। पोर्टेबल स्वच्छ मांस उत्पादन और खुदरा बिक्री इकाइयों का डिजाइन और निर्माण किया गया।

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पशु स्वास्थ्य

आईवीआरआई, मुक्तेश्वर में रिंडरपेस्ट के वैश्विक उन्मूलन (28-06-2011) की स्मृति में एक स्मारक।

भाकृअनुप-आईवीआरआई ने देश से पशु रोगों को नियंत्रित और समाप्त करने के लिए अनेक पशु चिकित्सा टीके और जैविक उत्पाद विकसित किए।

एवियन इन्फ्लूएंजा के लिए पांच डायग्नोस्टिक किट और Porcine Reproductive and Respiratory Syndrome Virus एंटीबॉडी का पता लगाने के लिए एक डायग्नोस्टिक किट का विकास तथा एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस एंटीबॉडी का पता लगाने के लिए indirect ELISA किट को वाणिज्यिक उत्पादन हेतु निजी उद्योग को हस्तांतरित किया गया।

नेशनल एनिमल डिजीज रेफरल एक्सपर्ट सिस्टम (NADRES) नामक रोग पूर्वानुमान और पूर्व चेतावनी मॉडल का डिजाइन, विकास और कार्यान्वयन।

राष्ट्रीय पशु रोग महामारी विज्ञान नेटवर्क (पूर्व में पशु रोग निगरानी एवं सर्वेक्षण पर अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना) की स्थापना।

‘मुर्गियों के लिए निष्क्रिय कम रोगजनक एवियन इन्फ्लूएंजा (H9N2) वैक्सीन’ का विकास और नई दिल्ली स्थित मैसर्स एग्रीनोवेट इंडिया लिमिटेड के माध्यम से 1.31 करोड़ रुपये के लाइसेंस शुल्क पर 4 लाइसेंसधारकों को प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण।

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पशु उत्पादन एवं प्रजनन

एनडीआरआई ने गंगा जैसे डेयरी पशुओं की क्लोनिंग में अग्रणी भूमिका निभाई।

वृंदावनी मवेशी: आईसीएआर-आईवीआरआई में स्वदेशी मवेशी (हरियाणा) का विदेशी नस्लों (ब्राउन स्विस, जर्सी और होल्स्टीन) के साथ संकरण करके विकसित एक संकर नस्ल।

गाय और भैंस के लिए Preg D गर्भावस्था निदान किट विकसित की गईं।

सीआईआरबी हिसार द्वारा भैंसों के लिए हस्तनिर्मित क्लोनिंग प्रोटोकॉल विकसित किया गया।

अधिक प्रजनन क्षमता (Avishaan) और महीन ऊन उत्पादन (Bharat Merino) के लिए नई भेड़ नस्लें विकसित की गईं।

भेड़ों में मद प्रेरण तथा समकालिकता के लिए प्रोजेस्टेरोन युक्त इंट्रावेजाइनल स्पंज (Avikesil-S) विकसित किए गए।

चार स्वदेशी ड्रोमेडरी ऊंट नस्लों की डेयरी क्षमता का मूल्यांकन किया गया है (कच्छी > मेवाड़ी > जैसलमेरी > बीकानेरी), और औसत दुग्ध उत्पादन 1600-2000 लीटर दर्ज किया गया (दुग्धकाल अवधि 420 दिन)।

आनुवंशिक सुधार, 16+2 नस्लों के इन-सीटू संरक्षण (AICRP के अंतर्गत), मल्टीप्लायर बकरी झुंडों की स्थापना, क्षेत्र-विशिष्ट, औषधीय और कम मीथेन उत्पन्न करने वाले आहार, निदान और टीके, वीर्य के क्रायोप्रिजर्वेशन, कृत्रिम गर्भाधान सहित नवोन्मेषी प्रजनन प्रौद्योगिकियों तथा विपणन रणनीतियों के माध्यम से अत्यधिक उत्पादक बकरी पालन मॉडल विकसित किया गया।

वार्षिक बकरी स्वास्थ्य/प्रजनन/जनन कैलेंडर, कम लागत वाला संतुलित आहार फॉर्मूलेशन और मूल्य संवर्धित बकरी दूध एवं मांस उत्पादों सहित अनेक क्षेत्र-उन्मुख बकरी-केंद्रित प्रौद्योगिकियां विकसित की गईं।

वनराजा, ग्रामप्रिया, श्रीनिधि, कृषिब्रो, श्वेतश्री, कृषिलेयर, वनश्री, जनप्रिया और असलीब्रो जैसी उन्नत ग्रामीण मुर्गी किस्में आईसीएआर-डीपीआर द्वारा विकसित की गईं और पूरे देश में प्रसारित की गईं। पोल्ट्री प्रजनन पर एआईसीआरपी के विभिन्न केन्द्रों ने छह स्थान-विशिष्ट मुर्गी किस्में (प्रतापधन, कामरूपा, नर्मदानिधि, झारसिम, हिमसमृद्धि और टोकबारी) विकसित कीं। आईसीएआर-डीपीआर के पैतृक जर्मप्लाज्म वाले संस्थान, एआईसीआरपी केन्द्रों तथा सरकारी एजेंसियों के माध्यम से हर वर्ष देशभर में लगभग 38-40 लाख वाणिज्यिक जर्मप्लाज्म की आपूर्ति की जा रही है।

अंडों में मानव इंटरफेरॉन अल्फा 2b के उत्पादन के लिए बायोरिएक्टर के रूप में ट्रांसजेनिक मुर्गी विकसित की गई। वृद्धि और अंडा उत्पादन बढ़ाने तथा कम कोलेस्ट्रॉल वाली मुर्गियां उत्पन्न करने के लिए जीनोम-एडिटेड और नॉक-डाउन मुर्गियां तैयार की गईं।

देशी मुर्गी-विशिष्ट मध्यम-घनत्व 74K SNP चिप, ‘INDICHICK’ चिकन SNP, GWAS/जीनोमिक चयन के लिए विकसित एक उत्पाद।

भारतीय जंगली बटेर और पारंपरिक मुर्गी के विकल्प के रूप में जापानी बटेरों का प्रसार।

CARI पोल्ट्री सीमेन डाइल्यूएंट का विकास।

CARINIRBHEEK – उन्नत देशी मुर्गी संकर।

एनबीएजीआर ने देश में 219 स्वदेशी पशु नस्लों को पंजीकृत किया है, जिनमें मवेशियों की 53, भैंस की 20, बकरी की 39, भेड़ की 45, घोड़ों और पोनी की 8, ऊंट की 9, सूअर की 14, गधे की 3, कुत्ते की 3, याक की 1, मुर्गी की 20, बत्तख की 3 और गीज़ की 1 नस्ल शामिल है। इन नस्लों को भारत सरकार द्वारा राजपत्र में भी अधिसूचित किया जा रहा है। इसके अलावा, ब्यूरो ने 1 सिंथेटिक मवेशी नस्ल और 2 मुर्गी लाइनों को भी पंजीकृत किया है। स्वदेशी नस्लों के पंजीकरण से देश के लगभग 50 प्रतिशत देशी पशुधन को वर्णित के रूप में मान्यता मिली है। इसके अलावा, देश में शून्य गैर-वर्णित पशु आनुवंशिक संसाधन (AnGR) के लक्ष्य के साथ, ब्यूरो ने राज्य AHDs, SAUs, SVUs आदि के सहयोग से मिशन मोड में देशव्यापी AnGR दस्तावेजीकरण तथा स्वदेशी नस्लों की पहचान और पंजीकरण भी शुरू किया है।

(SDG) संकेतक 2.5.1 के अंतर्गत AnGR के मध्यम और दीर्घकालिक संरक्षण के लिए ब्यूरो ने जर्मप्लाज्म का क्रायोप्रिजर्वेशन किया है- 63 स्वदेशी नस्लों/आबादियों के वीर्य और 57 नस्लों/आबादियों की सोमैटिक कोशिकाओं को ब्यूरो के राष्ट्रीय जीन बैंक में क्रायोप्रिजर्व किया गया है। ब्यूरो ने अब देश की 50 प्रतिशत से अधिक संकटग्रस्त स्वदेशी नस्लों के जर्मप्लाज्म का क्रायोप्रिजर्वेशन किया है।

आनुवंशिक संरचना को समझने के लिए मिथुन का संपूर्ण-जीनोम अनुक्रमण पूरा किया गया। इसके अलावा, वैज्ञानिक मिथुन उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए अनेक प्रौद्योगिकियां विकसित की गईं, जिनमें क्षेत्र-विशिष्ट खनिज मिश्रण, मिनरल डिस्पेंसर, दवा एप्लीकेटर के साथ एक्टोपैरासिटिक एक्सपेलर, संशोधित ट्रैविस, मूत्र-आधारित गर्भावस्था निदान किट, ट्रेसेबिलिटी और ऑनलाइन ट्रेडिंग के लिए ब्लॉकचेन-आधारित प्लेटफॉर्म तथा मांस और दूध का मूल्य संवर्धन शामिल हैं।

मिथुन को खाद्य पशु के रूप में मान्यता दी गई है। पूर्वोत्तर क्षेत्र के राज्यों में मिथुन उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए TSP के अंतर्गत 50 अर्ध-सघन मिथुन पालन इकाइयां और नागालैंड राज्य के खोनोमा और थोवोपिसुमी में दो संरक्षण इकाइयां स्थापित की गईं।

भाकृअनुप-राष्ट्रीय मिथुन अनुसंधान संस्थान को पांच पेटेंट, तीन डिजाइन पंजीकरण और दो कॉपीराइट प्रदान किए गए हैं। उद्यमिता विकास के लिए संस्थान द्वारा चार प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

शूकरों की दो स्वदेशी नस्लों (घुंगरू, INDIA_PIG_2100_GHOONGROO_0900, माली, INDIA_PIG_1900_MALI_09009) और सूअरों की दो विदेशी नस्लों (हैम्पशायर और लार्ज व्हाइट यॉर्कशायर) का संपूर्ण जीनोम अनुक्रमण पूरा किया गया।

नौ संकर शूकर किस्मों का विकास।

लैंडली शूकर: भाकृअनुप-आईवीआरआई में स्वदेशी शूकर का विदेशी लैंडरेस नस्ल के साथ संकरण करके विकसित एक संकर नस्ल।

याक वीर्य का क्रायो-संरक्षण और समयबद्ध कृत्रिम गर्भाधान का उपयोग करके याक के आनुवंशिक सुधार के लिए इसका उपयोग।

CRYODIL: भैंसों के लिए अंडे की जर्दी रहित, उपयोग के लिए तैयार वीर्य विस्तारक, जिसे आईसीएआर-NIANP बेंगलुरु द्वारा विकसित किया गया।

 

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